Weather Update Today: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, फरवरी के उत्तरार्ध में मौसम एक बार फिर बड़ी करवट लेने वाला है। ‘मोंथा’ तूफान और एक नए सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के संयुक्त प्रभाव से देश के 21 राज्यों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। 25 से 29 फरवरी के बीच राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-एनसीआर सहित कई हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है।
पहाड़ी राज्यों में भारी हिमपात की संभावना
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थिति चुनौतीपूर्ण रह सकती है:
- बर्फबारी का अलर्ट: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात (Snowfall) की संभावना है।
- यातायात पर असर: अचानक होने वाली बर्फबारी के कारण सड़क और हवाई यातायात बाधित हो सकता है। पर्यटकों को इन क्षेत्रों की यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मैदानी इलाकों में बारिश और ठिठुरन की वापसी
दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में वर्तमान में कड़ाके की ठंड से जो मामूली राहत मिली थी, वह जल्द ही खत्म होने वाली है:
- तापमान में गिरावट: बारिश और पहाड़ों से आने वाली सर्द हवाओं के कारण अगले 72 घंटों में न्यूनतम तापमान में एकाएक भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
- ओलावृष्टि की आशंका: फरवरी के आखिरी हफ्ते में सक्रिय होने वाला यह शक्तिशाली विक्षोभ मैदानी राज्यों में ओलावृष्टि (Hailstorm) भी ला सकता है। मुख्य रूप से राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कुछ जिलों में 20 से 28 फरवरी के दौरान ओले गिरने की चेतावनी दी गई है।
किसानों के लिए विशेष चेतावनी
यह मौसमी बदलाव खड़ी फसलों, विशेषकर गेहूं और सरसों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि:
- सिंचाई रोक दें: भारी बारिश की संभावना को देखते हुए खेतों में पानी न लगाएं।
- सुरक्षा के उपाय: कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें ताकि ओलावृष्टि और जलभराव से बचाव हो सके।
सुरक्षा और सावधानी के निर्देश
पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को अत्यधिक सतर्क रहने को कहा गया है। भूस्खलन (Landslide) और हिमस्खलन की संभावना को देखते हुए संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह मौसम रिपोर्ट वर्तमान उपग्रह चित्रों और मौसम विशेषज्ञों के विश्लेषण पर आधारित है। मौसम की तात्कालिक स्थिति में किसी भी समय बदलाव संभव है, इसलिए स्थानीय प्रशासन और मौसम केंद्रों द्वारा जारी सटीक दिशा-निर्देशों का पालन करें।









